भारत में आयकर रिटर्न फाइलिंग 2025 का समय आ गया है, और अगर आप सोच रहे हैं कि इस साल कैसे आसानी से अपना ITR भरें तो यह गाइड आपके लिए है। यह जानकारी सभी टैक्सपेयर्स के लिए उपयोगी है – चाहे आप पहली बार आयकर रिटर्न भर रहे हों या एक अनुभवी करदाता हों।
इस लेख में हम तीन मुख्य बातों पर फोकस करेंगे। पहले हम देखेंगे कि ऑनलाइन ITR भरने की प्रक्रिया कैसे काम करती है और कौन से दस्तावेज चाहिए होंगे। दूसरे, हम कर बचत के तरीकों पर बात करेंगे जो आपकी जेब में ज्यादा पैसे रख सकते हैं। आखिर में, हम आयकर रिटर्न की अंतिम तिथि और देरी से भरने पर लगने वाले जुर्माने के बारे में बताएंगे।
1.आयकर रिटर्न फाइलिंग की आवश्यक जानकारी
आयकर रिटर्न फाइल करना कब अनिवार्य है
अगर आपकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो आपको आयकर रिटर्न फाइलिंग 2025 करना जरूरी है। सीनियर सिटिजन्स (60-80 साल) के लिए यह सीमा 3 लाख रुपये है और सुपर सीनियर सिटिजन्स (80 साल से ऊपर) के लिए 5 लाख रुपये है।
कुछ खास परिस्थितियों में आपको कम आय पर भी ITR फाइल करना पड़ सकता है:
- विदेशी संपत्ति या खाते हैं
- धारा 139(1) के तहत निर्दिष्ट राशि से अधिक खर्च किया है
- कैश में 2 लाख रुपये से ज्यादा जमा किए हैं
- बिजली बिल सालाना 1 लाख रुपये से अधिक है
यहां तक कि अगर आपकी आय कम है लेकिन TDS कटा है, तो रिफंड के लिए रिटर्न फाइल करना फायदेमंद होता है।
विभिन्न आय स्लैब और टैक्स दरें
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आयकर की दरें इस प्रकार हैं:
पुराना टैक्स स्लैब (व्यक्तिगत करदाताओं के लिए)
सीनियर सिटिजन्स को अलग छूट मिलती है। इसके अलावा 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस भी लगता है।
नई टैक्स व्यवस्था बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था
दोनों व्यवस्थाओं में अपने फायदे हैं और आपको अपनी स्थिति के अनुसार चुनाव करना होगा।
पुरानी टैक्स व्यवस्था के फायदे:
- धारा 80C, 80D, 24B जैसी कई कटौतियां उपलब्ध
- होम लोन की ब्याज कटौती
- HRA की छूट
- मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम की कटौती
नई टैक्स व्यवस्था के फायदे:
- कम टैक्स रेट्स
- स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000
- सरल कैलकुलेशन
- कम पेपरवर्क
अगर आपकी कटौतियां कम हैं तो नई व्यवस्था बेहतर हो सकती है। लेकिन होम लोन, बीमा प्रीमियम जैसी बड़ी कटौतियां हैं तो पुरानी व्यवस्था फायदेमंद रहेगी।
फाइलिंग न करने के नुकसान
आयकर रिटर्न न फाइल करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं:
वित्तीय नुकसान:
- ₹5,000 तक का जुर्माना
- ब्याज का भुगतान (1% प्रति माह)
- नोटिस और कानूनी कार्रवाई
- TDS रिफंड नहीं मिलना
अन्य समस्याएं:
- बैंक अकाउंट फ्रीज हो सकता है
- क्रेडिट कार्ड की सुविधा बंद
- लोन अप्रूवल में दिक्कत
- वीजा अप्लाई करने में समस्या
- सरकारी नौकरी या टेंडर में दिक्कत
आयकर विभाग अब डिजिटल निगरानी बढ़ा रहा है। बैंक लेनदेन, क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, और अन्य वित्तीय गतिविधियों की निगरानी से छुपना मुश्किल है। समय पर ITR फाइलिंग ऑनलाइन करके इन सभी परेशानियों से बचा जा सकता है।
देर से फाइल करने पर भी जुर्माना लगता है, इसलिए समय सीमा का ध्यान रखना जरूरी है।
2.आयकर रिटर्न फाइलिंग से पहले की तैयारी
आवश्यक दस्तावेजों की सूची
आयकर रिटर्न फाइलिंग 2025 से पहले सभी जरूरी दस्तावेज एकत्रित करना बेहद महत्वपूर्ण है। सबसे पहले आपको अपना PAN कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाता विवरण तैयार रखना होगा। वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए Form 16 सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जबकि व्यापारियों को अपनी आय और व्यय का पूरा हिसाब-किताब रखना चाहिए।
अगर आपने शेयर मार्केट में निवेश किया है तो capital gains statement भी जरूरी है। घर के किराए से आय है तो rental agreement और property tax receipts रखें। FD, PPF, ELSS और अन्य निवेशों के certificates भी साथ रखें।
Form 16 और TDS सर्टिफिकेट का महत्व
Form 16 आपकी पूरी साल की कमाई और कटे गए TDS का detailed record है। यह दस्तावेज आपके employer द्वारा दिया जाता है और इसमें आपकी gross salary, allowances, deductions और tax liability की पूरी जानकारी होती है। ITR फाइलिंग ऑनलाइन करते समय Form 16 में दी गई जानकारी को सही तरीके से भरना जरूरी है।
अगर आपकी अलग-अलग sources से income है तो उन सभी के TDS certificates collect करें। Bank interest, dividend income, freelancing payment से कटा गया TDS भी दिखाना होगा। TDS certificate में दी गई details को carefully verify करें क्योंकि गलत information भरने पर notice आ सकती है।
बैंक स्टेटमेंट और निवेश प्रमाण पत्र एकत्रित करना
आयकर रिटर्न कैसे भरें, इसके लिए पूरे financial year का bank statement तैयार रखें। सभी savings और current accounts के statements लें। इससे आपकी actual income verify हो सकेगी और कोई भी cash deposit छुट नहीं जाएगी।
Tax saving investments का proper documentation रखना बहुत जरूरी है। Section 80C के under EPF, PPF, ELSS mutual funds, life insurance premium के certificates रखें। Section 80D के लिए health insurance premium receipts और medical checkup bills भी रखें। Home loan interest certificate, education loan interest statement जैसे documents भी important हैं।
Fixed deposits की maturity amount और interest details भी note करें। अगर आपने कोई property buy या sell की है तो उसकी sale deed और registration papers भी साथ रखें। Mutual fund statements में capital gains की calculation already होती है, इसलिए latest statements download करके रखें।
3.ऑनलाइन ITR फाइलिंग की चरणबद्ध प्रक्रिया
आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण
आयकर रिटर्न फाइलिंग 2025 के लिए सबसे पहला कदम है आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.incometax.gov.in पर खुद को रजिस्टर करना। आपको अपना PAN कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर तैयार रखना होगा। साइट पर जाकर “Register Yourself” के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपनी सभी जानकारी सही-सही भरें।
रजिस्ट्रेशन के दौरान आपको एक मजबूत पासवर्ड बनाना होगा जिसमें अपर केस, लोअर केस, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर हों। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा। इसे वेरीफाई करने के बाद आपका अकाउंट एक्टिव हो जाएगा।
सही ITR फॉर्म का चुनाव
ITR फॉर्म 2025 में कई तरह के फॉर्म उपलब्ध हैं और सही फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है। सैलरी से आय वाले लोगों के लिए ITR-1 (सहज) सबसे सरल है। अगर आपकी सैलरी के अलावा FD या बैंक इंटरेस्ट से भी आय है तो ITR-2 भरना होगा।
बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले लोगों को ITR-3 या ITR-4 चुनना चाहिए। कैपिटल गेन या शेयर ट्रेडिंग की आय है तो ITR-2 या ITR-3 की जरूरत होगी। गलत फॉर्म चुनने से बाद में परेशानी हो सकती है, इसलिए अपनी आय के सभी स्रोतों को ध्यान में रखकर फॉर्म सेलेक्ट करें।
आय की जानकारी भरना
ऑनलाइन ITR भरने की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है अपनी आय की सही जानकारी देना। अपने Form 16, बैंक स्टेटमेंट, FD इंटरेस्ट सर्टिफिकेट और दूसरे इनकम डॉक्यूमेंट्स को व्यवस्थित रूप से तैयार रखें।
सैलरी की जानकारी भरते समय Form 16 का इस्तेमाल करें। इसमें आपकी बेसिक सैलरी, HRA, DA और दूसरे allowances की पूरी डिटेल होती है। अगर आपने साल भर में जॉब चेंज की है तो सभी employers के Form 16 की जानकारी अलग-अलग भरनी होगी।
बैंक इंटरेस्ट, FD इंटरेस्ट, रेंटल इनकम जैसी Other Sources की आय भी सही-सही भरें। इनकम टैक्स रिटर्न भारत में TDS की जानकारी भी जरूरी है, जो Form 16A या 26AS से मिल जाती है।
कटौती और छूट का दावा करना
टैक्स सेविंग टिप्स का सबसे बड़ा फायदा यहाँ मिलता है। Section 80C के तहत PPF, ELSS, NSC, Life Insurance Premium की 1.5 लाख तक की कटौती ले सकते हैं। Section 80D में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की 25,000 तक की छूट है।
Standard Deduction की 50,000 की राशि सैलरी वाले लोगों को ऑटोमैटिक मिलती है। HRA exemption के लिए घर का किराया, HRA amount और सैलरी का 50% (मेट्रो सिटी में) या 40% (नॉन-मेट्रो में) में से सबसे कम राशि को छूट मिलती है।
Section 80EE में होम लोन इंटरेस्ट पर अतिरिक्त 50,000 की छूट और Section 24 में 2 लाख तक का इंटरेस्ट deduction ले सकते हैं। इन सभी कटौतियों के लिए जरूरी documents और receipts तैयार रखें।
टैक्स की गणना और भुगतान
सभी जानकारी भरने के बाद सिस्टम आपका टैक्स अपने आप calculate कर देता है। अगर TDS आपके actual tax से ज्यादा कटा है तो refund मिलेगा, कम कटा है तो additional tax pay करना होगा।
Tax payment के लिए net banking, debit card या NEFT का इस्तेमाल कर सकते हैं। Challan 280 भरकर online payment करें और transaction number को safely save करके रखें। Payment के बाद ITR verify करना जरूरी है।
Verification के लिए Aadhaar OTP, net banking या EVC (Electronic Verification Code) का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर ये options नहीं हैं तो ITR-V print करके CPC Bangalore को भेजना होगा। Verification के बिना आपका रिटर्न incomplete माना जाता है।
3.कर बचत के प्रभावी तरीके
Section 80C के तहत निवेश विकल्प
Section 80C भारतीय कर बचत के तरीके में सबसे लोकप्रिय प्रावधान है, जो सालाना 1.5 लाख रुपये तक की कर छूट प्रदान करता है। Provident Fund (PPF) इस सेक्शन का सबसे आकर्षक विकल्प है, जो 15 साल की लॉक-इन अवधि के साथ टैक्स-फ्री रिटर्न देता है। Equity Linked Saving Scheme (ELSS) म्यूचुअल फंड केवल 3 साल की लॉक-इन अवधि के साथ बेहतर रिटर्न की संभावना प्रदान करते हैं।
National Savings Certificate (NSC) और Tax Saving Fixed Deposits भी अच्छे विकल्प हैं। Life insurance premium, principal home loan repayment, और children’s tuition fees भी इस सेक्शन के तहत शामिल हैं। Sukanya Samriddhi Yojana बेटी के भविष्य के लिए बेहतरीन योजना है जो उच्च ब्याज दर और triple tax benefit देती है।
Section 80D में स्वास्थ्य बीमा की कटौती
स्वास्थ्य बीमा की कटौती Section 80D के तहत महत्वपूर्ण टैक्स सेविंग टिप्स में से एक है। स्वयं और परिवार के health insurance premium पर 25,000 रुपये तक की कटौती मिलती है। 60 साल से अधिक उम्र के माता-पिता के लिए अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट ली जा सकती है।
Preventive health check-up के लिए 5,000 रुपये की अलग कटौती भी उपलब्ध है। यदि आपके parents senior citizens हैं, तो combined deduction 80,000 रुपये तक जा सकती है। Medical insurance न केवल tax saving में मदद करता है बल्कि medical emergencies से भी सुरक्षा प्रदान करता है। Family floater policies cost-effective होती हैं और पूरे परिवार को कवर करती हैं।
होम लोन के फायदे
होम लोन भारत में सबसे बड़े tax benefits में से एक प्रदान करता है। Principal repayment पर Section 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की कटौती मिलती है, जबकि interest payment पर Section 24 के तहत 2 लाख रुपये तक की छूट ली जा सकती है। यदि property को rent पर दिया गया है, तो interest deduction की कोई सीमा नहीं है।
First-time home buyers को Section 80EE के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये की कटौती मिल सकती है। Joint home loan के case में दोनों co-borrowers अलग-अलग tax benefits claim कर सकते हैं। Home loan के stamp duty और registration charges भी tax deductible हैं। Pre-EMI interest भी claim किया जा सकता है, जो construction period के दौरान काफी फायदेमंद होता है।
4.ITR फाइलिंग की महत्वपूर्ण तिथियां और जुर्माना
ITR फाइलिंग की अंतिम तिथि
आयकर रिटर्न फाइलिंग 2025 के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको समय सीमा का पूरा ख्याल रखना होगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 (आकलन वर्ष 2025-26) के लिए आयकर रिटर्न की अंतिम तिथि आमतौर पर 31 जुलाई 2025 होती है। यह तारीख सभी व्यक्तिगत करदाताओं के लिए लागू होती है।
कंपनियों और ऑडिट की आवश्यकता वाले करदाताओं के लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 होती है। यदि आपकी आय 50 लाख रुपये से अधिक है या आपका व्यापार टैक्स ऑडिट के दायरे में आता है, तो आपको इस विस्तारित तिथि का फायदा मिलता है।
कई बार सरकार विशेष परिस्थितियों में इन तारीखों को बढ़ा भी देती है। इसलिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित जांच करते रहना जरूरी है।
विलंबित फाइलिंग पर लगने वाला जुर्माना
अगर आप ITR फाइलिंग की अंतिम तिथि के बाद रिटर्न दाखिल करते हैं, तो आपको भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यह जुर्माना आपकी कुल आय के आधार पर तय होता है।
जुर्माने की दर:
यदि आपकी आय 5 लाख से कम है लेकिन आपने 31 दिसंबर से पहले रिटर्न फाइल कर दिया है, तो जुर्माना घटकर 1,000 रुपये हो जाता है। वहीं अगर आपकी कोई टैक्स देनदारी नहीं है, तो कुछ मामलों में जुर्माना माफ भी हो सकता है।
देर से ऑनलाइन ITR भरने की प्रक्रिया में न केवल जुर्माना बल्कि ब्याज भी जुड़ता जाता है। यह ब्याज 1% प्रति माह की दर से लगता है।
संशोधित रिटर्न फाइल करने की सुविधा
कभी-कभी रिटर्न फाइल करने के बाद पता चलता है कि कोई गलती हो गई है या कुछ आय छूट गई है। ऐसी स्थिति में संशोधित रिटर्न (Revised Return) फाइल करने का विकल्प उपलब्ध है।
संशोधित रिटर्न फाइल करने की समय सीमा:
- आकलन वर्ष की समाप्ति से पहले (31 मार्च तक)
- मूल रिटर्न फाइल करने की तारीख के बाद कभी भी
उदाहरण के लिए, यदि आपने जुलाई 2025 में वित्त वर्ष 2024-25 का रिटर्न फाइल किया है, तो आप 31 मार्च 2026 तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
संशोधित रिटर्न फाइल करते समय आपको Section 139(5) का चुनाव करना होगा। यदि संशोधन में अतिरिक्त टैक्स निकलता है, तो उस पर ब्याज भी देना होगा। लेकिन अगर रिफंड मिलना है, तो वह भी ब्याज के साथ मिलता है।
टैक्स सेविंग टिप्स: हमेशा अपने आयकर रिटर्न दस्तावेज को दोबारा चेक करें ताकि बाद में संशोधन की जरूरत न पड़े।
Trendifytalks Tips
आयकर रिटर्न फाइलिंग आज के डिजिटल युग में एक सरल और व्यवस्थित प्रक्रिया बन गई है। सही दस्तावेजों के साथ उचित तैयारी करके आप आसानी से ऑनलाइन ITR फाइल कर सकते हैं और कर बचत के विभिन्न विकल्पों का फायदा उठा सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि समय पर फाइलिंग करना और सभी नियमों का पालन करना आवश्यक है।
2025 की कर फाइलिंग सीजन से पहले अपने सभी कागजात व्यवस्थित करें और निर्धारित तिथियों का ध्यान रखें। जुर्माने से बचने के लिए समय रहते अपना ITR फाइल करना शुरू कर दें। अगर आपको कोई कठिनाई आए तो किसी कर सलाहकार की मदद लेने में संकोच न करें – यह आपके पैसे और समय दोनों की बचत करेगा।